प्रशांत किशोर ने मोदी, राहुल और तेजस्वी को राजनीति की ‘Expired Medicin’ बताया

By: Rebecca

On: Wednesday, September 17, 2025 5:06 AM

Follow Us

भारतीय राजनीति में चर्चाओं और विवादों की कोई कमी नहीं होती। हाल ही में चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) ने एक ऐसा बयान दिया जिसने सियासी हलकों में तूफान ला दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को राजनीति की ‘Expired Medicines’ कह दिया।

बयान की पृष्ठभूमि

प्रशांत किशोर लंबे समय तक भारत की चुनावी रणनीति के माहिर खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने कई बड़ी पार्टियों को चुनाव जीतने में मदद की। लेकिन अब वे सक्रिय राजनीति में उतरकर खुद नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनका यह बयान केवल टिप्पणी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक चुनौती भी माना जा रहा है।

‘एक्सपायरी दवा’ का मतलब क्या?

PK ने तीनों नेताओं की तुलना “एक्सपायरी दवा” से की। इस उपमा का आशय यह है कि ये नेता जनता की असली समस्याओं का समाधान देने की स्थिति में नहीं हैं। जैसे कोई दवा एक्सपायर हो जाने पर असर नहीं करती, वैसे ही ये नेता अब लोगों को नई दिशा देने में सक्षम नहीं हैं।

नरेंद्र मोदी पर निशाना

भाजपा और मोदी के खिलाफ PK का यह बयान बेहद अहम है। मोदी को जनता का मजबूत और लोकप्रिय नेता माना जाता है। लेकिन PK का कहना है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद उनके नेतृत्व की “दवा” अब जनता पर असर नहीं कर रही। यानी जनता बदलाव चाहती है।

राहुल गांधी की राजनीति पर टिप्पणी

PK ने राहुल गांधी को भी “एक्सपायरी दवा” कहा। उनका इशारा कांग्रेस की लगातार हार और राहुल की राजनीति की कमजोर पकड़ पर था। कांग्रेस को लेकर जनता में भरोसा घटा है और PK का मानना है कि राहुल के नेतृत्व में पार्टी जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही।

तेजस्वी यादव को क्यों निशाना बनाया?

बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव को नई पीढ़ी का चेहरा माना जाता है। लेकिन PK ने उन्हें भी “एक्सपायरी” कहा। उनका तर्क है कि तेजस्वी जातिगत समीकरणों से आगे निकलकर नई राजनीति नहीं दे पा रहे। युवा होने के बावजूद उनकी राजनीति पुराने ढर्रे पर ही चल रही है।

जनता की अपेक्षाओं का मुद्दा

PK का बड़ा संदेश यह है कि जनता अब केवल वादों और नारों से खुश नहीं होगी। लोग रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसी ठोस नीतियों की अपेक्षा करते हैं। अगर नेता इन मुद्दों पर असफल रहते हैं तो वे “एक्सपायर” हो जाते हैं।

चुनावी रणनीतिकार से नेता तक का सफर

यह बयान सिर्फ टिप्पणी नहीं बल्कि PK के राजनीतिक सफर की झलक भी है। वे अब खुद जनता के बीच जाकर राजनीति कर रहे हैं और यह दिखाना चाहते हैं कि मौजूदा नेता समाधान नहीं दे पा रहे। यह बयान उन्हें “विकल्प” के रूप में पेश करने की कोशिश है।

विपक्ष और सत्ता – दोनों पर हमला

दिलचस्प बात यह है कि PK ने सिर्फ एक पार्टी को नहीं बल्कि सत्ता पक्ष (मोदी) और विपक्ष (राहुल, तेजस्वी) – दोनों को निशाना बनाया। इससे वे खुद को एक स्वतंत्र और निष्पक्ष विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

राजनीतिक संदेश और रणनीति

“एक्सपायरी दवा” वाला बयान सीधा और तीखा है। यह मीडिया में सुर्खियाँ बटोरने वाला जुमला है। PK जानते हैं कि राजनीति में आकर्षक बयान जनता का ध्यान खींचते हैं और यह बयान उनकी रणनीति का हिस्सा है।

भविष्य की राजनीति पर असर

यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि PK का यह बयान आने वाले चुनावों पर कितना असर डालेगा। लेकिन इतना तय है कि उन्होंने खुद को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। जनता पर यह संदेश गया कि मौजूदा नेता अब समाधान देने की स्थिति में नहीं हैं और नई सोच की ज़रूरत है।

निष्कर्ष

प्रशांत किशोर का “एक्सपायरी दवा” वाला बयान केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक गंभीर संदेश है। इससे वे यह बताना चाहते हैं कि भारत की राजनीति को पुराने नारों और नेतृत्व से आगे बढ़ने की ज़रूरत है। अब सवाल यह है कि क्या वे खुद जनता को वह “नई दवा” दे पाएँगे जिसकी लोग तलाश कर रहे हैं, या यह बयान भी केवल चर्चा तक सीमित रह जाएगा।

For Feedback - feedback@example.com

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment