बिहार, एक ऐसा राज्य जो अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, Prashant Kishor वर्षों से विकास और प्रशासन के कई मुद्दों का सामना कर रहा है। राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार के राजनीतिक और सामाजिक बदलाव को लेकर अपनी रणनीति और दृष्टिकोण साझा किया है। उनका मानना है कि “जन सुराज” यानी जनता के हित में प्रशासनिक और सामाजिक सुधार बिहार के विकास की कुंजी हैं।
जन सुराज का महत्व
प्रशांत किशोर के अनुसार, बिहार में विकास का वास्तविक केंद्र जनता है। केवल योजनाएँ बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी कार्यान्वयन और जनता तक पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है। जन सुराज का मतलब है पारदर्शी प्रशासन, जवाबदेही और सभी वर्गों के लिए समान अवसर।
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
प्रशांत किशोर मानते हैं कि बिहार के युवाओं की क्षमता का सही उपयोग तभी होगा जब उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यावहारिक कौशल प्रदान किया जाए। इसके लिए उन्होंने यह सुझाव दिया कि स्कूलों और महाविद्यालयों में डिजिटल शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम को बढ़ावा दिया जाए।
स्वास्थ्य सेवा में सुधार
स्वास्थ्य सेवाएँ बिहार के विकास का एक अहम पहलू हैं। किशोर का मानना है कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच बढ़ाना, अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारना और स्वास्थ्य कर्मियों की प्रशिक्षण योजनाओं को लागू करना आवश्यक है।
भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण
बिहार में विकास के रास्ते में भ्रष्टाचार एक बड़ी बाधा है। प्रशांत किशोर का दृष्टिकोण है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है। यह जनता का विश्वास बढ़ाता है और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों का विकास
किशोर का मानना है कि बिहार की प्रगति के लिए ग्रामीण विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अंतर्गत कृषि सुधार, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है। जब ग्रामीण क्षेत्र सशक्त होंगे, तभी राज्य का समग्र विकास संभव होगा।
महिला सशक्तिकरण
प्रशांत किशोर महिलाओं की भागीदारी को बिहार की विकास कहानी में अहम मानते हैं। महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करना, उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगा।
रोजगार सृजन और उद्यमिता
बिहार के युवाओं के लिए रोजगार सृजन प्रमुख चुनौती है। किशोर का दृष्टिकोण है कि छोटे और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन, स्टार्टअप कल्चर और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएं। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
राजनीतिक स्थिरता और पारदर्शिता
प्रशांत किशोर का मानना है कि बिहार में स्थिर राजनीतिक वातावरण और पारदर्शी शासन ही विकास के लिए आधारशिला है। जब निर्णय लेने की प्रक्रिया खुलेआम और निष्पक्ष तरीके से होगी, तब ही योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचेगा।
तकनीकी और डिजिटल बदलाव
आज के समय में डिजिटल इंडिया और तकनीकी नवाचार बिहार में जन सुराज को लागू करने का एक शक्तिशाली साधन हैं। किशोर का सुझाव है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी योजनाओं की निगरानी, शिकायत निवारण और सूचना का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जाए।
सामाजिक एकता और समावेशिता
अंततः, प्रशांत किशोर बिहार के परिवर्तन में सामाजिक एकता और समावेशिता को अहम मानते हैं। जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव के बिना सभी नागरिकों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना, राज्य के दीर्घकालिक विकास की कुंजी है।
निष्कर्ष
प्रशांत किशोर के अनुसार, बिहार में बदलाव की दिशा जन सुराज, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार नियंत्रण, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, रोजगार, राजनीतिक स्थिरता, डिजिटल नवाचार और सामाजिक समावेशिता के माध्यम से संभव है। उनका दृष्टिकोण यह स्पष्ट करता है कि विकास केवल योजनाओं से नहीं बल्कि प्रभावी कार्यान्वयन, पारदर्शिता और जनता की भागीदारी से आता है।
August 26, 2025