Bihar विधानसभा चुनाव की प्रारंभिक तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं। चुनाव आयोग ने बिहार में 46 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया और रैंडम मशीनों की पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है। इस ब्लॉग में हम इस प्रक्रिया की प्रमुख बातें और बातचीत का एक रूप लेकिन विस्तृत समीक्षा देंगे।
46 भाषा केन्द्र तैयारी
बिहार के 46 विभिन्न आभूषण और उप-जिलों में तीन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन दस्तावेजों पर सभी सुरक्षा और सार्वभौमिक व्यवस्थाएं पहले ही सुनिश्चित कर ली गई हैं। फ़िल्मों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि पूरी तरह से सुचारु और ग़ुलाम रूप से हो सके।
हर राउंड में 14 मोस्ट का प्रयोग किया जाता है
मातृभाषा प्रक्रिया में हर राउंड में 14 मोस्ट का प्रयोग किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य प्रक्रिया को मजबूती और सुरक्षा बनाए रखना है। इससे एक ही समय में कई जिलों के वोटों की गिनती की जा सकेगी और देर से होने की संभावना कम होगी।
रैंडम लाँच की प्रक्रिया
पोर्टफोलियो रैंडम डेटाबेस प्रक्रिया पूरी तरह से पासपोर्ट और पासपोर्ट सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है। इसमें विभिन्नता को अलग-अलग दौर में बदला जा सकता है ताकि किसी भी प्रकार की विकार या मानसिक विकार की आशंका न रहे
चुनाव आयोग की सक्रिय भूमिका
चुनाव आयोग इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है। सभी 46 कर्मचारियों पर आयोग के अधिकारी और पर्यवेक्षक होंगे। उनका काम है कि शब्दावली के दौरान कोई भी छात्र न हो और प्रक्रिया पूरी तरह से सही तरीकों से हो।
सुरक्षा के असबाबवाला
दस्तावेज़ पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है। पुलिस और सुरक्षा उपकरणों के अलावा सीसीटीवी कैमरे, बैरिकेडिंग और अन्य तकनीकी उपकरण लगाए गए हैं। इसका उद्देश्य मातृभाषा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा को लाभ है।
वोटिंग डेटा की जानकारी
मॉक्स का प्रयोग और रैंडम स्केल का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि स्टॉक की गिनती बिल्कुल सही तरीके से हो। हर राउंड में 14 मशीनों के इस्तेमाल से डेटा का मिलान किया जाता है, जिससे कोई भी त्रुटि सुरक्षित हो जाती है।
मातृभाषा का समय और प्रक्रिया
मातृभाषा प्रक्रिया सुबह से शुरू होगी और पूरे दिन जारी रहेगी। हर दौर के बाद नतीजों को सुरक्षित रखा गया। इस समय सारिणी को लेकर सभी अधिकारियों को पहले ही सूचित कर दिया गया है ताकि प्रक्रिया में कोई देरी न हो।
तकनीकी टीम की भूमिका
टेक्नोलोजी टीम के लिए हर केंद्र पर मौजूद रहने के लिए प्रयोगशाला की सही सूची। समूह के परीक्षण, सूक्ष्मजीव और अन्य तकनीकी प्रतिभागियों को अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी होगी। यह सुनिश्चित करना कि मौलिक पूरी तरह से बाधा उत्पन्न हो।
मीडिया और पर्यवेक्षक
चुनाव आयोग ने मीडिया और अन्य पर्यवेक्षकों से भी पूछा है कि वे किस प्रक्रिया का अनुपालन कर सकते हैं। इससे संबंधित पत्रिकाएं और सहायक कंपनियां और भी बढ़ जाएंगी। मीडिया की रिपोर्ट से जनता को भी हर अपडेट मिल सकता है।
जनता में विश्वास और विश्वास
इन सभी सहयोगियों का मुख्य उद्देश्य जनता का विश्वास बनाये रखना है। रैंडम समूह, 14 का उपयोग किया जाता है और 46 दस्तावेजों पर एपिसोड सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है कि बिहार चुनाव की शब्दावली पूरी तरह से आरक्षित और कर्मचारियों के रूप में हो।
निष्कर्ष
बिहार में चुनाव आयोग ने प्रारंभिक प्रक्रिया को पूरी तरह से सुरक्षित, तेज और स्थिर बनाने के लिए सभी कदम उठाए हैं। 46 रोल्स पर रैंडम मैजिक, हर राउंड में 14 मोशन पिक्चर्स का इस्तेमाल किया जाता है, सीक्वल सिक्योरिटी और टेक्नॉलजी सुपरविजन की निगरानी की जाती है। जनता को अब सिर्फ इन मूल्यों का इंतजार करना है और चुनाव आयोग के इस प्रयास को अपनाना चाहिए।





