Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनावों का माहौल पूरे राज्य में गर्म है। पटना समेत कई जिलों में नेताओं और आम जनता के बीच मतदान को लेकर भारी उत्साह देखा गया। इस बीच सबसे ज़्यादा चर्चा में रहा लालू प्रसाद यादव का परिवार, जिसने पटना में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने वोट डालने के बाद एक बड़ा राजनीतिक दावा किया, जिसने सियासी गलियारों में नई हलचल मचा दी।
पटना में सुबह-सुबह लालू परिवार की एंट्री ने बढ़ाया चुनावी तापमान
बिहार की राजनीति में लालू यादव परिवार का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। जैसे ही खबर आई कि लालू परिवार मतदान केंद्र पहुंचा है, मीडिया और समर्थकों की भीड़ जमा हो गई। राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्य सुबह-सुबह मतदान केंद्र पर पहुंचे। लोगों में उनके प्रति उत्साह स्पष्ट रूप से देखा गया, जिससे चुनावी माहौल और भी जोश से भर गया।
लालू परिवार की सादगीभरी उपस्थिति
मतदान के दौरान लालू परिवार ने एकदम सादे अंदाज़ में उपस्थिति दर्ज कराई। तेजस्वी यादव ने सफेद कुर्ता-पायजामा पहना हुआ था और बेहद संयमित अंदाज़ में मीडिया से बात की। राबड़ी देवी भी सरल लिबास में नजर आईं। जनता के बीच यह छवि एक “जनता के नेता” वाली छवि को और मजबूत करती है।
तेजस्वी यादव का बड़ा दावा – “जनता बदलाव चाहती है”
वोट डालने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा, “इस बार बिहार की जनता बदलाव के मूड में है। युवाओं, किसानों और गरीबों की आवाज़ इस बार निर्णायक होगी।” उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि आरजेडी को इस बार चुनावी परिणामों को लेकर आत्मविश्वास है।
चुनावी मुद्दे: बेरोजगारी, महंगाई और विकास पर फोकस
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में बेरोजगारी और महंगाई को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि बिहार का युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अगर उनकी सरकार बनी तो रोजगार और विकास पर विशेष फोकस रहेगा।
राबड़ी देवी ने महिलाओं से की अपील
लालू परिवार की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने मतदान के बाद कहा कि बिहार की महिलाएं अब जागरूक हैं और वे अपने अधिकारों के लिए वोट कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में मतदान करें ताकि सही सरकार चुनी जा सके।
परिवारिक एकता का प्रदर्शन – राजनीतिक संदेश भी
लालू परिवार का एक साथ मतदान केंद्र पर आना सिर्फ मतदान का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक प्रतीक भी था। यह दिखाने की कोशिश की गई कि परिवार पूरी तरह एकजुट है और नेतृत्व तेजस्वी यादव के हाथ में मजबूती से है। इससे पार्टी समर्थकों के बीच उत्साह और विश्वास दोनों बढ़ा है।
पटना में वोटिंग का उत्साह – युवा मतदाता केंद्र में
पटना सहित बिहार के कई हिस्सों में इस बार युवा मतदाताओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी बढ़-चढ़कर वोट डाले। लालू परिवार की उपस्थिति ने युवा मतदाताओं को भी प्रेरित किया। सोशल मीडिया पर तेजस्वी यादव की अपीलों का असर साफ देखने को मिला।
आरजेडी का आत्मविश्वास और विपक्ष की प्रतिक्रिया
तेजस्वी यादव के “बदलाव” वाले बयान के बाद विपक्षी दलों में हलचल मच गई। एनडीए नेताओं ने इसे सिर्फ “राजनीतिक बयानबाज़ी” बताया, जबकि आरजेडी समर्थक इसे जनता के मूड का संकेत मान रहे हैं। पटना और आसपास के इलाकों में लोगों से बात करने पर यह भी पता चला कि कई मतदाता इस बार मुद्दों के आधार पर वोट देने के पक्ष में हैं, न कि जातीय समीकरणों पर।
लालू यादव का स्वास्थ्य और जनता से जुड़ाव
हालांकि लालू प्रसाद यादव स्वास्थ्य कारणों से चुनावी अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं ले पा रहे, लेकिन उनका प्रभाव अभी भी आरजेडी समर्थकों के बीच ज़िंदा है। लोगों में आज भी “लालू युग” की यादें और भावनाएं हैं, जो तेजस्वी यादव की लोकप्रियता को और बढ़ा रही हैं।
क्या 2025 में बिहार की राजनीति में नया अध्याय लिखेगा यह चुनाव?
बिहार के इस चुनाव को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं बल्कि राजनीतिक दिशा बदलने वाला चुनाव साबित हो सकता है। तेजस्वी यादव जिस तरह युवाओं, रोजगार और विकास की बात कर रहे हैं, उससे यह संकेत मिल रहा है कि आरजेडी अब पुराने ढर्रे से आगे बढ़कर “नई राजनीति” की ओर बढ़ रही है।
निष्कर्ष: जनता की उम्मीदों का इम्तिहान
बिहार चुनाव 2025 सिर्फ एक राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों और नेताओं की नीयत का परीक्षण भी है। लालू परिवार का पटना में मतदान करना और तेजस्वी यादव का “बदलाव” वाला दावा इस चुनाव को और दिलचस्प बना देता है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि जनता का फैसला किस ओर जाता है स्थायी बदलाव की दिशा में या पुराने समीकरणों की वापसी में।





