बिहार की राजनीति हमेशा से ही जारी है- प्रस्ताव और दिलचस्प मोड़ों से भरी हुई है। इसी क्रम में जन सूरज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने एक बार फिर बड़ा NDA दावा करते हुए बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। उनका यह खुलासा सीधे-सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) को नजर आ रहा है।
प्रशांत किशोर का कथन और उसकी पृष्ठभूमि
प्रशांत किशोर ने अपने जन सुराज अभियान के तहत आम जनता से संवाद करते हुए नीतीश कुमार पर जानलेवा हमला किया। उन्होंने कहा कि बिहार की स्थिर राजनीति सिर्फ सत्ता और कुर्सी की लड़ाई जारी है। नीतीश कुमार की मांग थी कि कभी सुशासन का वादा किया गया था, अब केवल राजनीतिक समीकरणों में उलझे हुए हैं।
नीतीश कुमार पर सीधा वार
पीके ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने पिछले 20 सालों में जनता को सिर्फ सपना दिखाया, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं हुआ। उनका कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे आज भी वहीं हैं, जहां दो दशक पहले थे।
राजनीति गठबंधन की पोल खुली
किशोर ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार बार-बार सत्य असुरक्षा के लिए पाला बदल रहे हैं। कभी बीजेपी, कभी राजद, तो कभी कांग्रेस-हर पार्टी के साथ उनका हाथ मिलाना इस बात का सबूत है कि उनकी पार्टीवादी जनता नहीं बल्कि कुर्सी पर बैठी है।
अम्मी पर भी बड़ा आरोप
प्रशांत किशोर का मौलिक सिद्धांत तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि आप सिर्फ बिहार की सत्ता पर कब्जा जमाये रखने के लिए काम कर रहे हैं। जनता के सवाल पर किसी भी पार्टी का ध्यान नहीं है। यही कारण है कि बिहार आज भी पिछड़े राज्यों में शामिल है।
जनता की भावनाओं से खेल
किशोर ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि नेता बार-बार वोट बैंक की राजनीति करते हैं। जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बुलाया गया, ताकि सत्ता तक पहुंच आसान हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब पुराने खेलों पर ध्यान देने लगी है।
नीतीश कुमार की छवि प्रभावशाली
पीके के बयान में नीतीश कुमार की छवि सीधे तौर पर लगाई गई है। जो नेता खुद को “सुशासन बाबू” कहलवाने में गर्व महसूस करते थे, वे समाजवादी पार्टी पर सवाल उठाते हैं। यह नौकरी को और मजबूत बना सकता है।
गुणांक पर प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर प्रशांत किशोर अपने इस राज्य को लगातार आगे बढ़ाते हैं, तो आने वाले विधानसभा चुनाव में साफ नजर आएगा। यह रेलवे और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।
पीके की रणनीति और जन सुराज अभियान
प्रशांत किशोर पहले भी नामांकित रणनीति बना रहे हैं। उन्होंने देश की कई बड़ी वेबसाइटों को जीता है। अब जब वे खुद जन सूरज अभियान चला रहे हैं, तो यह साफ है कि वे बिहार की राजनीति को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
सूची को दर्शाया गया है
पीके के इस बयान में कहा गया है कि कोई नया हथियार नहीं दिया गया है। राजद और कांग्रेस जैसे दलों से पहले नीतीश कुमार की आलोचना होती रही है, लेकिन अब उनके करीबी प्रशांत किशोर के शब्द भी एक अतिरिक्त ताकत के रूप में हैं।
बिहार की जनता की पड़ता
आख़िरी सवाल जनता की उम्मीदों का है। बिहार के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और विकास की मांग कर रहे हैं। पीके का कहना है कि अगर सही नेतृत्व सामने आएगा तो बिहार भी आगे बढ़ सकता है। उन्होंने अपनी बात को लेकर और भी गंभीर बातें कहीं।
निष्कर्ष
प्रशांत किशोर का यह खुलासा केवल एक राजनीतिक बयान नहीं बल्कि बिहार की राजनीति का सच्चा आईना है। नीतीश कुमार और नीतीश कुमार पर लगाए गए आरोप निश्चित रूप से आने वाले दिनों में बड़ी बहस का विषय है। जनता अब बदलाव चाहती है, और PK वही बदलाव की आवाजें उभर कर सामने आ रही हैं। आने वाले चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका यह बड़ा खुलासा बिहार की सीता की दिशा बदलता है या नहीं।





